नींद आती नहीं है ,ये क्या हो गया ?
रात जाती नहीं है, ये क्या हो गया ??
प्रेम हो या कि हो हादसा आँख अब !
छलछलाती नहीं है ,ये क्या हो गया !
अब किसी भी चरण पर कोई आस्था !
सर झुकाती नहीं है, ये क्या हो गया !!
वैसे कहने को तो रातरानी है ये !
गमगमाती नहीं है, ये क्या हो गया !!
हम ने पायल गढ़ाई ग़ज़ल बेच कर !
छनछनाती नहीं है ,ये क्या हो गया !!
मीर की हो ग़ज़ल या कि दुष्यंत की !
गुदगुदाती नहीं है ,ये क्या हो गया !!
खिलखिलाती नहीं ज़िन्दगी सब्र था !
मुस्कुराती नहीं है, ये क्या हो गया !!
अपनी तारीफ है और अपनी जवां !
थरथराती नहीं है, ये क्या हो गया !!
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