सोमवार, 22 दिसंबर 2008

ये क्या हो गया.........? (ग़ज़ल)

नींद आती नहीं है ,ये क्या हो गया ?

रात जाती नहीं है, ये क्या हो गया ??



्रेम हो या कि हो हादसा आँख अब !

छलछलाती नहीं है ,ये क्या हो गया !


अब किसी भी चरण पर कोई आस्था !

सर झुकाती नहीं है, ये क्या हो गया !!


वैसे कहने को तो रातरानी है ये !

गमगमाती नहीं है, ये क्या हो गया !!


हम ने पायल गढ़ाई ग़ज़ल बेच कर !

छनछनाती नहीं है ,ये क्या हो गया !!


मीर की हो ग़ज़ल या कि दुष्यंत की !

गुदगुदाती नहीं है ,ये क्या हो गया !!


खिलखिलाती नहीं ज़िन्दगी सब्र था !

मुस्कुराती नहीं है, ये क्या हो गया !!


अपनी तारीफ है और अपनी जवां !

थरथराती नहीं है, ये क्या हो गया !!



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