शनिवार, 12 सितंबर 2009

है बिलाशक ये दरिया चमन के लिए .....( ग़ज़ल )

ग़ज़ल
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है बिलाशक ये दरिया ,चमन के लिए !
चन्द बूँदें तो रखलो तपन के लिए !!

बदमिज़ाजी न बादल की सह पाऊंगा !
मुझको मंज़ूर है प्यास मन के लिए !!

वो तगाफुल नहीं मुझसे कर पाएंगे !
चाहिए आहुती भी हवन के लिए !!

याद रखता है इतिहास केवल उन्हैं !
जो कफन ओढ़ पाते हैं फ़न के लिए !!

हम भरे जा रहे पृष्ठ पर पृष्ठ हैं !
ढाई आखर बहुत थे सृजन के लिये !!

घर जला है तो फ़िर कुछ जला ही नहीं !
' पर ' जलाए हैं हमने गगन के लिए !!

लाख सर हों तुम्हारे चरण पर मगर !
चाहिए एक कांधा थकन के लिए !!

सर उठाना तुम्हारा बहुत खूब पर !
एक देहरी तो रख्खो नमन के लिए !!


( तगाफुल --उपेक्षा,उदासीनता )


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