शनिवार, 20 फ़रवरी 2010

ग़ज़ल

घातों में कुछ नहीं मगर हाँ बातों में कुछ तो दम है !
अंधों को भी बेच दिया है मैंने सुरमा क्या कम है !!

तुम्हें भले संसार दिखाई पड़ता हो केवल सपना !
लेकिन मुझको तो लगता है जुल्फों में अब भी ख़म है !!

यूँ ही नहीं गँवाई हमने जान बेवजह पंडित जी !
खंज़र उसके हाथ सही पर आँख अभी उसकी नम है !!

जबसे कारा की खिड़की पर तूने ज़ुल्फ़ बिखेरी है !
तबसे सजा सुनाने वालों के चेहरों पर मातम है !!

अब तो इन जंजीरों को ही हमने पायल मान लिया !
लोहू तो रिसता रहता है , लेकिन पाँव छमाछम है !!


कारा -- जेल

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17 टिप्‍पणियां:

kshama ने कहा…

अब तो इन जंजीरों को ही हमने पायल मान लिया !
लोहू तो रिसता रहता है , लेकिन पाँव छमाछम है !!
Poori rachana gazab hai...alfaaz nahi! Saathi anupam geyata liye hue!

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

घातों में कुछ नहीं मगर हाँ बातों में कुछ तो दम है !
अंधों को भी बेच दिया है मैंने सुरमा क्या कम है !!

बहुत खूब .. .बहुत अच्छी रचना ...

दिगम्बर नासवा ने कहा…

यूँ ही नहीं गँवाई हमने जान बेवजह पंडित जी !
खंज़र उसके हाथ सही पर आँख अभी उसकी नम है

वाह .. कमाल का शेर है ... पहला शेर भी बहुत कमाल का है .. सुभान अल्ला ...

दीपक भारतदीप ने कहा…

क्या बात है त्रिवेदी जी! आप लिखते रहें तो हमारा आत्मविश्वास बढ़ता है।
दीपक भारतदीप

अमिताभ मीत ने कहा…

बहुत खूब ... उम्दा शेर ... बेहतरीन ग़ज़ल.

प्रकाश पाखी ने कहा…

अब तो इन जंजीरों को ही हमने पायल मान लिया !
लोहू तो रिसता रहता है , लेकिन पाँव छमाछम है !!
बहुत सुन्दर लिखा है आपने,
शेरों में मिसरा ए सानी गजब ढा रहे है..

venus kesari ने कहा…

ललित जी आप की गजलें हमेशा उस्तादाना होती है आज ये गजल भी बहुत पसंद आयी खास कर हर शेर एक नए आयाम को प्रस्तुत कर रहा है

निवेदन है की गजल की बहर और रुक्न भी लिख दिया करे जिससे हम नए सीखने वालो को भी कुछ सीखने को मिले

पी.सी.गोदियाल ने कहा…

बेहतरीन ग़ज़ल !

रश्मि प्रभा... ने कहा…

तुम्हें भले संसार दिखाई पड़ता हो केवल सपना !
लेकिन मुझको तो लगता है जुल्फों में अब भी ख़म है !!
kya baat hai !

Mithilesh dubey ने कहा…

बेहतरीन , लाजवाब , उम्दा ।

रंजना ने कहा…

यूँ ही नहीं गँवाई हमने जान बेवजह पंडित जी !
खंज़र उसके हाथ सही पर आँख अभी उसकी नम है !!

अब तो इन जंजीरों को ही हमने पायल मान लिया !
लोहू तो रिसता रहता है , लेकिन पाँव छमाछम है !!


वाह वाह वाह ....क्या बात है...हर शेर सीधे घायल करने वाले हैं....लाजवाब रचना है ....लाजवाब !!!! आनंद आ गया पढ़कर...आपका बहुत बहुत आभार...

psingh ने कहा…

बहुर सुन्दर गजल
आभार

Amit Kumar ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति....बधाई !!
______________
सामुदायिक ब्लॉग "ताका-झांकी" (http://tak-jhank.blogspot.com)पर आपका स्वागत है. आप भी इस पर लिख सकते हैं.

वीनस केशरी ने कहा…

ललित जी आपका ईमेल पता चाहिए एक जरूरी मेल भेजनी है

venuskesari@gmail.com

डॉ.भूपेन्द्र कुमार सिंह ने कहा…

बहुत दिनों बाद फिर एक नायाब ग़ज़ल ,बधाई हो .कहाँ हो आप आजकल ,कोई बात नहीं ,टिपण्णी नहीं ,बात क्या है /
लिखते रहिये /
सदर,
डॉ.भूपेन्द्र

kshama ने कहा…

Kya baat hai, bade dononse aapne naya kuchh likha nahi? Aapke geeton ka intezaar rahta hai!

अरुणेश मिश्र ने कहा…

सुन्दर रचना ।